देवनारायण फड़ परम्परा  Devnarayan Phad Tradition

चौबीस बगड़ावतों की कथा

बगड़ावत और रावजी नौलखा बाग में दारु पीते-पिलाते


नियाजी से मिलकर नीमदेवजी वापिस रावजी के पास जाकर कहते हैं कि वे तो बाघ जी के बेटे बगड़ावत हैं। रावजी कहते हैं कि फिर तो वेे अपने ही भाई है ।

रावजी सवाई भोज के पास आकर उनको अपना धर्म भाई बना लेते हैं। और उन्हें बड़े आदर के साथ नौलखा बाग में ठहराते हैं और खूब दारु पिलाते हैं।

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यह बात सुनकर पातु शर्त के लिये तैयार हो जाती है और सवाई भोज के पास जाती है और अपनी सारी दारु सवाई भोज की हथेली में उंडेलती है। यहां तक की पातु की सारी दारु खतम हो जाती है। उसकी दोनों दारु की झीलें सावन-भादवा भी खाली हो जाती है। मगर सवाई भोज की हथेली खाली रह जाती है, भर नहीं पाती है। यह देखकर पातु घबरा जाती है और सवाई भोज के पांव पकड़ लेती है और कहती है कि आप मुझे अपनी राखी डोरा की बहन बना लीजिये। और सवाई भोज को राखी बान्ध कर अपना भाई बना लेती है।

 

 
 

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