देवनारायण फड़ परम्परा  Devnarayan Phad Tradition

देवनारायण के कारनामें

 

देवनारायण द्वारा पार्वती के शेर का वध          

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शेर देवनारायण और छोछू भाट के सामने आकर खड़ा हो जाता है। भाट डर के मारे उछल कर ऊपर एक पलाश के पेड़ पर चढ़ जाता है।

देवनारायण शेर को कहते हैं कि भाई तुमने हमारा रास्ता क्यो रोका ?ंगा। हमें जाने दो। शेर कहता है कि मैं तो तुम्हें खा अगर बचना चाहता हैं तो मुझसे लड़ना पड़ेगा।

देवनारायण कहते हैं शेर तू तो है मांसाहारी जीव। मैं तुझे अपने शस्र से नहीं मार्रूंगा। ऐसा कर पहले तू नहा कर आ, मैं तेरा यहीं इन्तजार कर रहा हूं। शेर नहा कर आता है फिर शेर देवनारायण से कहता है मैं भी आपसे नहीं लडूंगा। आपने जो चमड़े कि जूतियां पहनी है, उसे खोल कर मुझसे लड़ो।

देवनारायण अपने जूते खोल कर अपने खांड़े के एक ही वार से शेर का सिर धड़ से अलग कर देते हैं। फिर भाट पेड़ से नीचे उतर कर कहता है कि अभी शेर नहीं मरा, इसके प्राण तो नाभी में है। और अपनी कटार निकाल कर शेर की नाभी में मारता है और कहता है कि यह अब मरा है। देवनारायण यह देख कर भाट पर हंसते हैं।

 

 
 

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