Yugantar

(अन्तरंग-वार्त्ता) Yugantar

विश्वनाथ

प्रथम संस्करण १५ सितम्बर २००१ मूल्य सामान्य संस्करण : ५०.००


प्रातः स्मरणीय

सुधांशु शेखर चौधरीक

समृति मे


क्रम सूची

  1. श्री उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास'

  2. डॉ. जयकान्त मिश्र

  3. प्रोफेसर श्री उमानाथ झा

  4. श्री जटाशंकर दास

  5. श्री गोविन्द झा

  6. डॉ. श्रीमती अणिमा सिंह

  7. प्रोफेसर श्री आनन्द मिश्र

  8. श्री चन्द्रनाथ मिश्र 'अमर'

  9. श्रीमती लिली रे

निवेदन

२४ मइ २००१... अक्षर-अक्षर अमृतक प्रकाशन मेल रहय। आइ थिकैक १५ सितम्बर २००१... युगान्तर अपनेक हाथमे दैत हमर मोन विह्वल भ' रहल अछि। अन्दाज १९७५क जाड़-मास रहइक। भवानी पुर उग्रनाथ महादेव मन्दिर परिसरमे आयोजित विद्यापति-स्मृति पर्वक कविगोष्ठीसँ घुरैत काल रेल यात्राक क्रममे भवानीपुरसँ दरभंगा बीच प्रातः स्मरणीय डा. व्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म' क सान्निध्य प्राप्त भेल रहए। कहलनि-'टेप आ कैमरा राखू।' अपन समाज आ संस्कृतिक अनेक विन्दु पर गप्प कहलनि। तकर बाद अनेक खेप सम्पर्क भेल। १९७७ मे मोतिहारी मे एक राति स्टेसन पर हुनक आलोकमय उपस्थितिमे

बीतल रहए। अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद्क संगोष्ठी, दरभंगासँ लहेरियासराय धरि मैथिलीक जुलूसक नेतृत्व करैत मणिपद्मजी... आ तकर बाद बड़ी रेलवे लाइनक आन्दोलन क्रममे सत्याग्रह करैत दरभंगाक स्टेशन पर बैसल रहथि। प्रणाम कएलियनि। कुशल क्षेम। कहलनि- ''हमर आब की ? हमर आब कोन ठेकान ?''   बहेड़ामे हुनक बासा पर जा कए हुनकासँ गप्प करबाक इच्छा रहए। ओ मिथिला आ मैथिलक नव जाग्रत स्वाभिमानक प्रतीक रहथि। जनकपुर सँ आएल रही। १९८६ । सी. एम. कॉलेजक लाइब्रेरी मे अखबार सब उनटबैत रही। नजरि पड़ल-डा. व्रजकिशोर वर्मा मणिपद्मक देहान्तक सूचना। मिथिला आ मैथिलीक एकान्त साधक, लोकतांत्रिक सासंकृतिक चेतनाक गवेषक एकटा महान विभूतिक अन्तभ' गेल।

मुदा हुनक प्रेरणा हमरा सदैव आन्दोलित करैत करैत अछि। एकटा चिनगारी... एकटा ज्वलित चेतना... एकटा इजोत-हुनक स्मरणमे हम श्रद्धांजलि अर्पित क' रहल छी।

प्रातः स्मरणीय डा. शैलेन्द्र मोहन झा हमर गुरु। साहित्यक विभिन्न सूत्रक परिज्ञान हुनकासँ होइत रहल। मधुश्रावणी, पथ हेरथि राधा कतेक खेप पढ़ने होएब। जखन-जखन मैथिलीमे हम लिखैत छी हुनक स्मरण भ' अबैत अछि। हुनक सम्मोहक व्यक्तित्व, सुललित मधुर भाखा आ निश्छल-सरल छवि हमर मोनकें एखन आप्लावित कएने अछि।

पटनासँ प्रकाशित मिथिला मिहिरक संस्थापक सम्पादक आदरणीय सुधांशु शेखर चौधरीकें तरुण पीढ़ीक साहित्यकारक प्रति अनन्य स्नेह रहनि। हुनक दृष्टि, सम्पादन कला, प्रखर साहित्यिक चेतना आ प्रगतिशील विचार धारासँ हम अनुप्राणित होइत रहलहुँ। आब नहि छथि। हुनक अक्षर-चेतना जीवन्त अछि।

अक्षर-अक्षर अमृत मे मैथिलीक सात गोट शीर्षस्थ साहित्यकारसँ साक्षात्कार सम्भव भेल रहय। हिनका लोकनिक जन्म १९०६ सँ १९११क काल खंडमे भेल रहनि। एहि पुस्तकमे कवि चूड़ामणि 'मधुप', डा. काञ्चीनाथ झा 'किरण', प्रोफेसर हरिमोहन झा, तंत्रनाथझा, श्री सुरेन्द्र झा 'सुमन', नागार्जुन यात्री आ आरसीप्रसाद सिहंक संग भेल साक्षात्कार प्रस्तुत कएल गेल छल।

युगान्तरमे १९१२ सँ १९३३ धरिक काल खण्डकें आधार मानि नओ गोट मैथिलीक साहित्यकारक अन्तरंगवार्त्ता प्रस्तुत करैत हम पुनः सूत्र धारक रुपमे आइ मंच पर उपस्थित छी। बीतल कालखण्डक अनेक घटनाक्रम हमर मोन प्राणकें उद्वेलित करैत रहैत अछि। महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंहक अकाल मृत्यु... दरभंगा सँ म.म. डा. गंगा नाथ झाक प्रस्थान... चन्दा झा आ लाल दासक रामायण... मुर्दा क्लब आ साहित्य पत्र ...मुजफ्फरपुरमे विभूतिक प्रकाशन आ बाबू भुवनेश्वर सिंह भुवनक अनवरत संघर्ष... मिथिला मिहिर आ मिथिलांक... बाबू भोला लाल दास ... मिथिला आ भातीक प्रकाशन... प्रोफेसर हरिमोहन झाक कन्यादान आ द्विरागमन. कीचक बध आ ब्लैंक भर्स... विश्वविद्यालयमे मैथिलीक प्रवेश... कीर्तनियाँक प्रसंग... काशी आ मिथिला मोद। काशी आ कविवर सीताराम झा। पटना आ चेतना समिति। मिथिलाक गाम आ किरणजी। मिथिलाक लोक गाथा आ मणिपद्मजी। गाँधीबाद आ रमाकरजी।

आ तकर सभक बीचमे जड़ताकें तोड़ैत पारोक प्रकाशन... मिथिलाक खिड़की-केवाड़ीकें खोलैत चित्राक कविता !

आ तकर बाद तें कतेक घटना, कतेक मोड़, कतेक विन्दु उठल अछि आ खसल अछि। कथाकार ललित आ

ललितक मैथिलीमे उपेक्षा। स्वरगंधा आ राजकमल चौधरी... आदिकथा आ आन्दोलन... महिषीक उग्रतारा... नव कविता आ रामकृष्ण झा किसुन.. राजकमलक मृत्यु ! प्रवासी मैथिल... कोलकत्ताक जन-अरण्यमे संघर्ष करैत मैथिल जन। नेपालक गिरि-प्रान्तरमे सुदीर्घ मैथिलीक अमृत साधना।...

   युगान्तर अपनेक हाथमे आछि। १९९८ मे श्री व्यासजीसँ, १९९९ मे श्री गोविन्द झा सँ, २००० मे प्रोफेसर श्री आनन्द मिश्र, पंडित श्री चन्द्रनाथ मिश्र अमर, डा. श्रीमती अणिमा सिंह आ श्रीमती लिली रे सँ साक्षात्कार सम्भव भेल। २००१ मे प्रोफेसर श्री उमा नाथ झा, श्री जटा शंकर दास आ डा. जयकान्त मिश्र सँ साक्षात्कार भेल रहए। मिथिला आ मैथिलीक समग्र विकासक हेतु संरचनातमक एकताक अपेक्षा अछि। गामसँ नगर धरि आ नगर सँ महानगर धरि पसरल मिथिलाक विशाल परिधिकें एक सूत्रमे लयबद्ध करैत अपन आत्म अस्तित्वकें होम कर' पड़त ! आत्ममुग्ध मैथिल समाजक जागरणक समय आबि गेल अछि। चौक चौराहा जागि गेल अछि। सड़क... पाँतरमे जागरण भ' रहल अछि। जय छठि परमेश्वरी... लाल-लाल अरुहुल आ जय श्यामा माइ.. फगुआ आ चैतावर ... सबतरि मैथिलीक कैसेट अनुगुंचित भ' रहल अछि ?

हमरा लोकनि जे अपनाकें बुद्धिजीवी कहैत छी... सूतल छी ! किएक सूतल छी ?

दृश्य पर दृश्य बदलैत रहल अछि।

आर्थिक संरचना, भूस्वामित्व, जमींदार आ जमींदारी ताम-झाम क्रमिक जर्जर होइत अलोपित जकाँ भेल जा रहल अछि। किसान आंन्दोलन, जन-मजदूरक जागरण, भू-दान आन्दोलन... नक्सलवाद आ गामक स्वरुप बदलैत रहल।

भावना सँ यथार्थ धरि लोकक मोन दउगैत रहलैक।

स्री विमर्श, स्री वाद, स्री-स्वातंत्र्य पर जोरदार बहस होइत रहल आ विभिन्न तरहक उत्पीड़नक जाल मे पड़ल नित दिन अहिल्या पाथर बनैत रहलीह। अप्पन मिथिला मे आब आत्म मंथन चलि रहल अछि। सामंतवादक ढेर पर उगल चल जाइत जंगल मे आगि लागल अछि। भूख आ असामानताक आगि। सेक्स आ देहक जंगल। अनेक प्रश्न उठि रहल अछि। अनेक बिन्दु पर जबाब चाही। युगान्तरक जन्म एहने परिस्थति आ पृष्ठभूमि मे भेल अछि।

युगान्तर अहाँके केहन लागल ? अहाँ लिखब किने ? फेर जँ कोनो गली, मोड़, चौक चौराहा पर हमरा किछु भेटि गेल तँ हम नेपथ्यसँ मंच पर आएब !

विश्वनाथ

दरभंगा,                                                              

१५ सितम्बर २००१    

 


© आशुतोष कुमार, राहुल रंजन  

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