कल्चरल इन्फॉर्मेटिक्स (सीआईएल) – एक मल्टीमीडिया शोध केन्द्र

कल्चरल इन्फॉर्मेटिक्स प्रयोगशाला की स्थापना सन् 1994 में एक मल्टीमीडिया शोध केन्द्र के रुप में, यूएनडीपी द्वारा अनुमोदित “नेशनल फेसिलिटी फार इन्टरएक्टिव मल्टीमीडिया डाक्यूमेंटेशन आफ कल्चरल रिसोर्सेज” परियोजना के अन्तर्गत की गई।कला के विभिन्न प्रारूपों तथा सूचना तकनीकी के बीच सामंजस्य स्थापित करना एवं तदनुरूप मल्टीमीडिया का विकास और प्रदर्शन आदि विषयों में सीआईएल ने एक नई पहचान बनाई। कम्प्यूटर विज्ञान, संस्कृत, वास्तु, कर्मकाण्ड, पुरातत्त्व, पुरालेख, ललितकला, संगीत कला, छायापट आदि के विद्वानों की सहभागिता से काम करना इस विभाग की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। विशेषज्ञों के तत्त्वावधान में मल्टीमीडिया टीम ने कला में सन्निहित ज्ञान का गहराई से विश्लेषण करने में विशेष दक्षता हासिल की। संस्कृति के समग्र और एकीकृत अवधारणा में, परम्पराओं को कम्प्यूटर के माध्यम से पुन: सृजन कर दर्शाना, इस विभाग के प्रमुख कार्यकलापों में है।

 

भारतीय कला के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती इन परियोजनाओं को विश्व स्तरीय विद्वानों के मार्गदर्शन में शुरु किया गया, जिनमें वास्तुकला में राजराज चोल द्वारा निर्मित तंजावुर (तमिलनाडु) का बृहदीश्वर मंदिर, संस्कृत काव्य में महाकवि जयदेवकृत गीत-गोविन्द, लोकगाथा में राजस्थान की बगड़ावत देवनारायण गाथा, यज्ञों में अग्निचयन एवं शिल्पकला में विश्वरूप – भगवान श्रीविष्णु का बृहद् स्वरूप, प्रमुख हैं।

 

कम्प्यूटर, कला के विभिन्न आयामों को आसानी से समाहित करने में सक्षम है, अत: सीआईएल द्वारा विकसित मल्टीमीडिया को केंद्र की गतिविधियों के समनुक्रम के अंतिम चरण में रखा गया है। सीआईएल द्वारा सम्पादित कार्यों को मल्टीमीडिया सीडी/डीवीडी/पेन-ड्राईव के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के कई परियोजनाओं को सीआईएल ने कुशलतापुर्वक आगे बढाया है जिनमें वैदिक हेरिटेज पोर्टल, नेशनल कल्चरल अॉडियो विजुअल आर्काईव्स, कलासम्पदा आदि प्रमुख है। कलासम्पदा परियोजना के अन्तर्गत इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के संग्रहों को उसके सूचीबद्ध जानकारी के साथ, संस्थागत कम्प्यूटर नेटवर्क पर उपलब्ध करायी गई है। कलासम्पदा को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत मंत्रालय, भारत सरकार से 2004 के लिए Best Documented Knowledge and Case Study के तहत ई-शासन के अनुकरणीय कार्यान्वयन के लिए प्रतिष्ठित गोल्डन आइकन पुरस्कार (GOLDEN ICON Award) प्राप्त हुआ है।

 

यह पांडुलिपियों, स्लाइड, किताबें, ऑडियो और वीडियो के अपने वर्तमान भंडार को डिजिटल स्वरूप में सामग्री के प्रसार के एक केन्द्र बिन्दु के रूप में भी कार्य करता है। विभिन्न प्रकार की सामग्री के डिजिटलीकरण के लिए पालन किए जा रहे डिजिटाइजेशन मानकों को भी यहाँ उपलब्ध कराया गया है, जिसे समय समय पर विशेषज्ञों कि सहायता से नवीनीकरण किया जाता है।

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Image from Agnicayana Projectश्रीमती नीना रंजन, आईएएस, राष्ट्रीय परियोजना समन्वयक, यूएनडीपी परियोजना द्वारा पूर्व राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन को मल्टीमीडिया सीडी-रॉम प्रस्तुत करते हुए