कला सम्पदा

कला सम्पदा

भारतीय कला से संबंधित ज्ञान को, कला के विभिन्न माध्यमों को अपेक्षित महत्व देते हुए एक एकीकृत तरीके से उपलब्ध कराना केन्द्र के प्रमुख कार्यकलापों में है। कलासम्पदा में इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के संग्रहों को डिजिटाईजेशन के माध्यम से, उसके सूचीबद्ध जानकारी के साथ, एकीकृत रूप से, उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के द्वारा सांस्कृतिक विविधता को उपयोगकर्ताओं (छात्रों, विद्वानों, कलाकारों, और अनुसंधान और वैज्ञानिक समुदाय आदि) को इन्टरएक्टिव मोड में उपलब्ध कराना है। कलासम्पदा केन्द्र के उच्च शोध प्रकाशन, पांडुलिपियों, स्लाइड, दुर्लभ किताबें, तस्वीरें, ऑडियो और वीडियो को विद्वानों (उपयोगकर्ता) तक आसानी से पहुंचाता है।

 

कलासम्पदा में भारत और विदेश के विभिन्न संस्थानों से संग्रहित दुर्लभ पांडुलिपियां (जो मुख्यतया माईक्रोफिल्म और माईक्रोफिस में एकत्रित है), 100000 से अधिक छायाचित्रों (स्लाइड) को जो अमेरिकन काउन्सिल आफ साउथ एशियन आर्ट (एसीएसएए), ब्रिटिश लाइब्रेरी, विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय इत्यादि संस्थानों से है, दुर्लभ छायाचित्रों (फोटोग्राफ) जैसे राजा दीनदयाल संग्रह, शम्भुनाथ साहा संग्रह, ज्योति भट्ट संग्रह आदि तथा ऑडियो/वीडियो को एकीकृत तरीके से उपलब्ध कराया गया है।

 

प्रोजेक्ट की प्रमुख गतिविधियां में सामग्रियों का डिजिटलीकरण, पोस्ट डिजिटलीकरण संपादन, डिजिटल भंडारण और संरक्षण के साथ ही प्रभावी खोज प्रणाली शामिल है। भारतीय भाषाओं के लिए ओपन टाईप यूनिकोड फोंट (जो पूरे विश्व में स्वीकार्य है) प्रयुक्त किया गया है। सामग्री के उपलब्ध मेटाडाटा को अंततः विस्तारित डबलिन कोर में परिवर्तित किया जाएगा, जैसाकि दुनिया भर के डिजिटल लाइब्रेरी प्रोजेक्ट में बहुलता से प्रयोग किया जाता है। प्रयोक्ता के पास किताबों, पांडुलिपियों, स्लाइड, ऑडियो, वीडियो आदि संग्रह से अपनी रूचि की सामग्री खोजने का विकल्प है। ये सामग्रियां बौद्धिक संपदा अधिकार, कॉपीराइट, अन्य अधिकार आदि के अंतर्गत होने के कारण वर्तमान में यह सुविधा केवल इंट्रानेट पर ही उपलब्ध है।

 

इस परियोजना को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत मंत्रालय, भारत सरकार से 2004 के लिए Best Documented Knowledge and Case Study के तहत ई-शासन के अनुकरणीय कार्यान्वयन के लिए प्रतिष्ठित गोल्डन आइकन पुरस्कार (GOLDEN ICON Award) प्राप्त हुआ है।

 

दिनांक 30-11-2005 को आयोजित कार्यशाला की फोटो देखें